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Archive for February, 2015

मजबूत सरकार हमेशा सही दिशा में नहीं चलती : रघुराम राजन RBI GOVERNOR

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हिटलर का उदाहरण देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आगाह किया कि जरूरी नहीं है कि कोई मजबूत सरकार हमेशा सही दिशा में ही चले। इसके साथ ही उन्होंने अनियंत्रित अधिकारों वाले या फिर ‘पूरी तरह शिथिल’ प्रशासन के बजाय बीच का रास्ता अपनाने का सुझाव दिया।

राजन यहां ‘लोकतंत्र, समावेश व संपन्नता’ पर एक व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत में न्यायपालिका, विपक्ष, मीडिया व गैर सरकारी संगठन जैसे मजबूत संस्थान हैं, फिर भी सरकार व नियामकीय क्षमताओं को मजबूत किए जाने की जरूरत है। राजन ने कहा, ‘हमें अनियंत्रित प्रशासनिक अधिकार देने अथवा पूरी तरह शिथिल प्रशासन की स्थिति के बीच का एक बेहतर मध्य मार्ग चुनना होगा। हमें इस बात को ध्यान में रखना होगा कि हमारी स्थिति, विकसित पश्चिमी देशों अथवा अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों से अलग है।’

उन्होंने कहा कि मजबूत सरकार का नेतृत्व उन लोगों के पास होना चाहिए जिनके पास विशेषज्ञता, प्रेरणा व ईमानदारी हो और जनता की जरूरतों को पूरा कर सकें। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि, जरूरी नहीं कि मजबूत सरकारें, सही दिशा में जाएं।

उन्होंने कहा, ‘हिटलर ने जर्मनी को बहुत प्रभावी शासन दिया था। रेलगाड़ियां समय पर चलती थीं जैसा कि हमारे यहां आपातकाल 1975-77 के दौरान रेलगाड़ियां समय पर चलती थीं।’ राजन ने कहा, ‘उनकी मजबूत सरकार थी लेकिन हिटलर कानून के शासन की अनदेखी करते हुए जर्मनी को विनाश के पथ पर ले गए।’

रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा,‘ रेलगाड़ियों का समय पर चलना ही पर्याप्त नहीं है, उन्हें वांछित समय पर सही दिशा में भी जाना चाहिए।’ राजन ने कहा कि आर्थिक समावेश से तात्पर्य सतत आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने के वास्ते सभी को अच्छी शिक्षा, पोषक आहार, स्वास्थ्य देखभाल, वित्त और बाजार उपलब्ध हो।

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मोदी के ताने का AAP सरकार ने ऐसे दिया जवाब

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जो बिजली बना नहीं सकते, वे मुफ्त बिजली के वादे कर रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को यह बात कही थी। कई लोगों का मानना था कि उन्होंने यह तंज अरविंद केजरीवाल सरकार पर किया था। अब केजरीवाल सरकार ने केंद्र से कहा है कि वह उसे एक कोल ब्लॉक दे, जिसकी मदद से कोई प्राइवेट फर्म दिल्ली में पर्याप्त मात्रा में किफायती बिजली मुहैया कराने के लिए एक बड़ा पावर प्लांट लगा सके। दिल्ली के पावर मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ने ईटी को यह जानकारी दी है।

जैन ने बताया कि राज्य सरकार के पास पावर सेक्टर में रिफॉर्म की बड़ी योजना है। इसके तहत रिन्यूअबल और परंपरागत, दोनों स्रोतों से बिजली उत्पादन को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘हमने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि जहां भी संभव हो, हमें एक कोल ब्लॉक दिया जाए। हम इस बारे में जल्द औपचारिक अनुरोध करेंगे। हमारी योजना अगले 4-5 वर्षों में अपने दम पर 4,000 मेगावॉट बिजली बनाने की है।

जैन ने कहा कि नई सरकार जिस बड़े आइडिया पर काम कर रही है, उसके मुताबिक इसके अपने कोल ब्लॉक से किसी प्राइवेट फर्म को ‘अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट’ चलाने के लिए ईंधन दिया जाएगा। वहां पैदा हुई बिजली दिल्ली को मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘हम इसके लिए कॉम्पिटिटिव बिडिंग कराएंगे और प्राइवेट प्रॉड्यूसर को ब्लॉक के पास ही कोयले से बिजली बनाने का मौका देंगे। इस तरह उसे कोयला दिल्ली लाने और यहां बिजली बनाने की जरूरत नहीं होगी। इससे लागत बचेगी। बनाई गई बिजली ग्रिड्स के जरिये दिल्ली लाई जा सकती है। हम प्रॉड्यूसर से पावर परचेज अग्रीमेंट करेंगे और जितनी बिजली की खपत हम करेंगे, उसका उसे भुगतान किया जाएगा।’
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PM Modi has had a lucky tenure till now; doing biz remains tedious: Deepak Parekh

18 Feb, 2015, 2006 hrs IST, PTI

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Parekh has said that impatience has begun creeping in among businessmen as nothing has changed on ground in first nine months of the Modi govt.
MUMBAI: Pitching for relaxing “administrative controls” to improve ease of doing business, top industry leader Deepak Parekh feels that impatience has begun creeping in among businessmen as nothing has changed on ground in first nine months of the Narendra Modi government.

He said the industry is still optimistic about the changes it expects from the Modi government, but optimism is not translating into revenues and there has been little improvement on ‘ease of doing business’ front so far.

Parekh, who is known as a guiding voice of the Indian industry and has been on a number of key government panels on various policy and reform matters, further said that ‘Make in India’ can’t succeed unless it is made easier for people to do business here and the decisions are fast-tracked.

“I think there is still a lot of optimism among the people of the country and among the industrialists and entrepreneurs that the Modi government will be good for business, for progress, for reducing corruption. They think this government means business on all these fronts.

“However, after nine months, there is a little bit of impatience creeping in as to why no changes are happening and why this is taking so long having effect on the ground.

“The optimism is there but it is not translating into revenues. Any industry you see, when there is a lot of optimism, the growth should be faster,” Parekh said.

Parekh, an eminent banker and Chairman of financial services giant HDFC, has always been very vocal with his views on reform and policy measures taken by the various governments over the past three decades.

He was among the first industry leaders to openly criticise the previous UPA Government for “policy paralysis” after a spate of scams led to decisions getting delayed within the government and business began getting hurt.

“The thing is that our Prime Minister had a lucky period in these nine months. The world commodity prices are at all-time low which help India the most,” Parekh said.

Stating that India is again at a position when everyone is looking at it with high hopes, he said, “I don’t see ease of doing business changing so far.”

Parekh cited the example of delay faced by his own group’s HDFC Bank, the country’s top private sector lender, with regard to approvals required for raising of funds, including from overseas.

हिन्दी ट्रांसट्रांसलेशन
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किरण बेदी को सीएम उम्मीदवार बनाया जाना बीजेपी की बड़ी भूल : आरएसएस

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आरएसएस ने किरण बेदी को दिल्ली चुनाव में बीजेपी की हार का जिम्मेदार बताया है। यही नहीं संघ ने किरण बेदी को सीएम कैंडिडेट बनाए जाने को बीजेपी की बड़ी भूल माना है। संघ ने अपने मुखपत्र में लिखे एक लेख में कई सवाल भी उठाए हैं।
अपने मुखपत्र पांचजन्य के ताजा अंक में बीजेपी की हार के कारणों का विश्लेषण किया है। संघ ने किरण बेदी के सीएम कैंडिडेट बनाए जाने को बीजेपी की बड़ी भूल माना है। इसके साथ ही संघ ने पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी को पार्टी की हार की एक बड़ी वजह माना है।

अपने मुखपत्र में ‘आकांक्षाओं की उड़ान’ शीर्षक से कवर स्टोरी प्रकाशित कर संघ ने सवाल किया है, ‘बीजेपी क्यों हारी? क्या बेदी को सीएम कैंडिडेट बनाना सही था? अगर हर्षवर्द्धन या दिल्ली बीजेपी के दूसरे नेताओं के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया होता तो परिणाम दूसरे होते?’

Arvind Kejriwal take oath as Delhi CM

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विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत हासिल करने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को दिल्ली के आठवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली और अपने मंत्रियों, विधायकों व कार्यकर्ताओं को अहंकार से बचने की सलाह देते हुए दिल्ली को देश का पहला भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाने का वादा किया। अरविंद केजरीवाल ने छह अन्य मंत्रियों के साथ शपथ ली। केजरीवाल ने अपने पास कोई भी विभाग नहीं रखने का फैसला किया।

दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में भारी जनसमूह की मौजूदगी में उपराज्यपाल नजीब जंग ने केजरीवाल और छह अन्य मंत्रियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन छह मंत्रियों में मनीष सिसोदिया, आसिम अहमद खान, संदीप कुमार, सत्येंद्र जैन, गोपाल राय और जीतेंद्र सिंह तोमर शामिल हैं। 14 फरवरी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के ठीक साल भर बाद शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद 46 वर्षीय केजरीवाल ने अपने 35 मिनट के संबोधन में अपनी सरकार की प्राथमिकता गिनाई।

अण्णा आंदोलन और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने कहा कि पिछली बार जब 49 दिनों की ‘आप’ की सरकार बनी तो हमारे कट्टर विरोधियों ने भी माना कि भ्रष्टाचार कम हुआ था। पिछली बार इस बात को लेकर रोमांच था कि हम भ्रष्टाचार खत्म करेंगे, इस बार विश्वास है कि ऐसा होगा। हम पांच वर्षों में दिल्ली को देश का पहला भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाएंगे। लगातार तालियों और नारों के बीच केजरीवाल ने पिछली बार की तरह लोगों से भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए लोगों को ‘स्टिंग’ करने की सलाह देते हुए कहा कि हम उस भ्रष्टाचार विरोधी टेलीफोन लाइन को फिर से चालू करेंगे जो 49 दिनों की हमारी सरकार के दौरान शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि जनलोकपाल विधेयक पास करना जरूरी है और जितनी जल्द हो सके, हम जनलोकपाल विधेयक पास कराएंगे। लगातार दो दिन से बुखार से पीड़ित केजरीवाल को शपथ लेने के समय भी सौ डिग्री बुखार था।

बीमार होने के कारण ही वे तय कार्यक्रम के हिसाब से शपथ लेने के बाद महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर नहीं जा सके। समारोह के बाद दिल्ली सचिवालय जाकर कार्यभार ग्रहण किया। साढ़े चार बजे होने वाली मंत्रिमंडल की बैठक भी उनके बीमार होने से नहीं हो पाई। कौशांबी के अपने घर से निकल कर सीधे 12 बजे रामलीला मैदान आए। उनके साथ उनके परिवार के लोग और वाहनों के काफिले में उनके भावी मंत्रिमंडल के सहयोगी और पार्टी के अन्य पदाधिकारी थे। पिछली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए केजरीवाल मेट्रो से रामलीला मैदान पहुंचे थे।

रामलीला मैदान में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी और करीब तीन हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था जिनमें दिल्ली पुलिस, आइटीबीपी, सीआरपीएफ, सीआइएसएफ और एसएसबी के जवान शामिल थे। सवा बारह बजे उपराज्यपाल नजीब जंग के आने पर करीब 35 मिनट का शपथ ग्रहण समारोह चला। समारोह खत्म होने पर पिछली बार की तरह इस बार भी उन्होंने लोगों को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि जब इतनी बड़ी सफलता मिल जाए तो अहंकार जाग सकता है। जब अहंकार जाग जाए तो फिर कुछ भी नहीं बचता। ऐसे में सभी मंत्रियों, सभी विधायकों व कार्यकर्ताओं को चौकन्ना रहना होगा और देखना होगा कि कहीं अहंकार तो नहीं जाग गया। केजरीवाल ने भ्रष्टाचार और सांप्रदायिक तत्त्वों के खिलाफ कदम उठाने, वीआइपी संस्कृति खत्म करने और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की दिशा में प्रयास करने का भी वादा किया। केजरीवाल ने इस संबंध में पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से देश के अन्य राज्यों में आप के चुनाव लड़ने को लेकर दिए गए बयानों का जिक्र किया और कहा कि इससे लगता है कि अहंकार आ रहा है। उनका कहना था कि मैं पांच साल दिल्ली में रहकर दिल्ली की जनता की सेवा करूंगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लोगों ने हराया क्योंकि उसमें अहंकार आ गया था। भाजपा को पिछले साल मई में जबर्दस्त सफलता मिली लेकिन इस बार चुनाव में उसे लोगों ने हराया क्योंकि भाजपा में अहंकार आ गया था। हमें इससे बचना है।

केजरीवाल ने कहा कि हम केंद्र सरकार के साथ सकारात्मक व रचनात्मक सहयोग चाहते हैं और दिल्ली के विकास के लिए किरण बेदी, अजय माकन समेत भाजपा, कांग्रेस के अच्छे लोगों का सहयोग लेंगे क्योंकि हमें ‘पार्टीबाजी’ नहीं करनी है। आप ने 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में 67 सीटों पर ऐतिहासिक जीत हासिल की है जबकि तीन सीटें भाजपा को मिली हैं। उनके मुताबिक, शायद ऊपरवाला (भगवान) कोई बड़ा काम उनसे करवाना चाहता है। उन्होंने मीडिया को नसीहत देते हुए कहा कि सरकार घंटे के हिसाब से नहीं चलती है। जितने दिनों में दूसरे दलों ने किया, उससे जल्दी करूंगा। शपथ लेने से पहले ही हमने काम शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए दिल्ली के नए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे देश चलाएं और दिल्ली चलाने की जिम्मेदारी दिल्लीवालों पर छोड़ दें। हम दिल्ली के विकास के लिए केंद्र के साथ सकारात्मक व रचनात्मक सहयोग करेंगे। उन्होंने दिल्ली को पूर्ण राज्य देने की मांग भी की।

हाल में चर्चों और शुक्रवार को एक ईसाई स्कूल में हुई तोड़फोड़ की पृष्ठभूमि में केजरीवाल ने कहा कि हम सब मिलकर भाइचारे के साथ रहना चाहते हैं। हाल के दिनों में हमने दिल्ली में कई सांप्रदायिक घटनाएं देखीं। मैं ऐसे लोगों को चेतावनी देना चाहता हूं, जो इसके लिए जिम्मेदार हैं, जो इस किस्म की राजनीति कर रहे हैं। लोग उन्हें बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि हम दिल्ली को ऐसा स्थान बनाना चाहते हैं जहां हर मुसलमान, हर ईसाई, हर सिख, हर जैन, हर वर्ग और हर जाति के लोग सुरक्षित महसूस करें।

उन्होंने कहा-दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार के तहत नहीं आती है। लेकिन हम पुलिस से सहयोग लेंगे। सरकार चलाने के लिए पैसे चाहिए। दिल्ली के सभी व्यापारियों से कहना चाहता हूं कि उन्हें अब कोई तंग नहीं करेगा। आप अपना कारोबार करें। लेकिन साथ ही अपनी इच्छा से टैक्ट भर दें। मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि आपके पैसे की चोरी नहीं होगी। जनता को गले से लगा लो तो जनता अपना विकास खुद कर लेती है। उन्होंने कई लोगों से स्कूल-कालेज बनाने के लिए मिले प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि अच्छी नीयत हो तो इतने पैसे से भी विकास हो सकता है।

भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी और कांग्रेस नेता अजय माकन का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने कहा कि मैं किरण बेदी का काफी सम्मान करता हूं। पुलिस प्रशासन में उनका अच्छा अनुभव है। मैं उनकी सलाह लूंगा। अजय माकन का नीतियां बनाने और सरकार चलाने में अनुभव है, मैं उनका भी सहयोग लूंगा। हम भाजपा व अन्य दलों के अच्छे लोगों के साथ मिलकर काम करेंगे। अमीर और गरीब मिलकर काम करेंगे और दिल्ली को आगे बढ़ाएंगे।

कानून का उल्लंघन करने वाले किसी व्यक्ति को नहीं बख्शे जाने पर जोर देते हुए केजरीवाल ने कहा कि कुछ लोग आप कार्यकर्ता के रूप में अपने आप को पेश करके छवि खराब करने की कोशिश कर सकते हैं। मैं कानून का अनुपालन करने वाले तंत्र से कहना चाहता हूं कि गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल किसी को भी नहीं बख्शा जाए।

दिल्ली के नए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण का समापन इंसानियत और भाईचारे का संदेश देती फिल्म ‘पैगाम’ का गीत गाकर किया। साल 2013 में पहले शपथ ग्रहण के दौरान भी केजरीवाल ने यही गाना गाया था। यह गीत कवि प्रदीप ने लिखा था और इसे मन्ना डे ने स्वरबद्ध किया था। रामलीला मैदान में भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी में इस गीत की शुरुआत करते हुए केजरीवाल ने मजाकिया लहजे में कहा कि वे अच्छा गाना नहीं गाते। बुखार में होने के बावजूद वे पूरे जोश से बोल रहे थे और समारोह में मौजूद दिल्ली और विभिन्न राज्यों से आए लोग उसी उत्साह से नारे लगा रहे थे। समारोह तो महज एक घंटा चला लेकिन लोग सवेरे दस बजे से समारोह खत्म होने के बाद तक जमे रहे।

Rajkumar Meena

Rajat Sharma: How owner and face of India TV became one of India’s most powerful editors

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Delhi’s political establishment considers Sharma, who was an active student politician from AVBP, BJP’s student wing, to be a remarkably well networked person.
He’s close to Prime Minister Narendra Modi, BJP president Amit Shah and Finance Minister Arun Jaitley. He counts many Congress heavyweights and Bollywood’s big stars as friends. Some of India Inc’s savviest investors, including group companies and companies associated with billionaires Gautam Adani and Mukesh Ambani, have put money in his company. His life started in a 100 square feet room he shared with nine family members in a grimy Delhi locality, but Rajat Sharma (58), editor-in-chief and chairman of India TV, is arguably now India’s most powerful editor.

Delhi’s political establishment considers Sharma, who was an active student politician from AVBP, BJP’s student wing, to be a remarkably wellnetworked person. The buzz about him is that he has access to VVIPs and occasionally advises or counsels important politicians. But Sharma, awarded Padma Bhushan this year, has a different take: “It is unfortunate that you refer to my 30 to 40 year old relationships as networking…Most of my friends are with me from my days of struggle when I was nothing and they were also struggling…”, Sharma told ET while answering a detailed set of questions from ET over email.

He said he had first interviewed Modi when the latter was a BJP general secretary. “Modi’s witty remarks impressed me”, says Sharma. India TV’s financials are out-of-ordinary as well. Independent News Service Private Limited, the parent company of India TV, was incorporated in 1997. But capital build up started from March 2006, two years after the channel was launched. Among India TV’s past and present investors are Aditya Corpex Private Ltd, a group company of the Gautam Adani-owned Adani Group, as well as Shyam Equities, a wholly owned subsidiary of Tally Solutions that has as directors, Anand Jain and Manoj Modi, two aides of RIL chairman, Mukesh Ambani.

A group company of HFCL, which is owned by Mahendra Nahata who has close business associations with RIL, is also an investor. (See box: India TV Financials). May be it’s friendship and not networking, the fact is Sharma is an unusually well-connected editor, even by the standards of Delhi’s political-media establishment that has seen many ‘influential’ editors.

India TV’s 21st anniversary celebration of Aap ki Adalat — the signature show helmed by Sharma — in December 2014 saw the PM give the opening address, followed by President Pranab Mukherjee. Politicians from virtually all parties, Bollywood biggies including the three Khans, Shahruk, Salman and Aamir, media barons were all in attendance. Uday Shankar, CEO of Star India and one of India’s most powerful media honchos, recalls that Sharma gave him his first break in television when everyone else had virtually told him he was not fit for TV.

“It was Holi and I was jobless…this was years ago…Rajat was working on Holi because he’s a workaholic…I called him and told him I needed a job…and he told me to come over”, Shankar recalled. This year, his network had bought the telecast rights of the Aap ki Adalat’s 21st anniversary show. “There was an emotional connect,” Shankar says, on STAR hosting the show. Sharma’s show had run on Star for a few years.

That anniversary show telecast by Star had a remarkable moment: The PM’s speech on Sharma saw Modi saying, “ye mere liye thanksgiving ka avsar hai” (this is a thanksgiving occasion for me). The PM also said, referring to his pre-election interview with Sharma—India TV got the first interview with Modi as BJP’s PM candidate—that the platform complemented efforts from BJP workers in getting the message out.

Delhi’s establishment tells and retells plenty of anecdotes on Sharma and the PM. Around the time Amit Shah was appointed general secretary, BJP and was set to take charge of UP for general elections, Modi had asked Rajat Sharma to “advise Shah on UP’s political intricacies”, a BJP leader told ET on condition of anonymity. Shah had driven to Sharma’s India TV offices in Noida to have a chat with him. Another story shared by a BJP leader and officials of the Sri Lankan embassy said Sharma played a role in India’s negotiations with Sri Lanka on the release of jailed Indian fishermen.

Sharma was in Sri Lanka and with the then Sri Lankan president, Mahinda Rajapaksa, when Rajapaksa had called Modi to tell him Colombo was freeing the fishermen. Sharma, again, has a different take on his relationship with the PM. “I have no reason to meet the PM,” he says and to buttress his argument on not being a mover and shaker pointed to his decision to stay away from the recent presidential banquet for Barack Obama. “I chose to go ahead with the recording of a show abroad…my viewers have given me the platform of my shows.

I don’t need to meet the PM.” Sharma contests suggestions that he may be sympathetic to BJP. “In my 33 years of journalism I have made friends across political parties. I am sympathetic to my friends irrespective of the party they belong to. But I don’t allow that to interfere with my work. I have always fought for free, fair and fearless journalism,” he told ET. But senior Congress leaders, who did not want to be identified, say the Sharmas — Rajat and his close aide Hemant Sharma, a director at India TV — played a “significant role” in BJP’s Lok Sabha campaign, including Modi’s decision to pick the Varanasi constituency.

A senior BJP leader points out that when the PM visited Varanasi last November and launched the Swach Bharat Abhiyan, Manu Sharma, Hemant Sharma’s father, was one of the nine people nominated from the state for that project. The others included such notables as UP Chief Minister Akhilesh Yadav, singer Kailash Kher, comedian Raju Srivastav and cricketers Suresh Raina and Mohammed Kaif. Shatrughan Sinha, ex-Bollywood and a BJP leader, candidly describes Rajat Sharma as being hugely influential and humble, a “yaaron ka yaar” (friend of friends).

“Sharma today is more influential than many ministers in the cabinet. He can get a seat in any House, any award because he knows everyone, but it’s his humility that keeps him grounded. He is a lifetime friend,” says Sinha. Sinha recalls how a few years back Sharma had mediated between him and Amar Singh, who was then a powerful leader of the Samajwadi Party. Finance Minister Arun Jaitley is one of Sharma’s closest friends. At that Aap Ki Aadalat anniversary party, Sharma had said Jaitley has been his “moral police”. Sharma and Jaitley were ABVP activists and alumni of Delhi’s Sri Ram College of Commerce.

Sharma rose to being a general secretary of ABVP and courted arrest during the Emergency. CPM leader Sitaram Yechury remembers the student leader Sharma as someone “totally into Sangh ideology… with fierce views against Congress”. Sharma told ET his relationship with “Arun Jaitley, Lalu Yadav and Sharad Yadav go back to university days, when we were all part of the JP movement.” Late Congress leader Rajesh Pilot became his friend, Sharma says, when Pilot delivered milk to Delhi’s VIP homes.

Sharma’s point is that personal relationships developed over years, not political networking, explain the list of his powerful friends. He says although he has no relationship with Rahul or Priyanka Gandhi he “had an equation” with their father, ex-PM late Rajiv Gandhi. Congress treasurer Moti Lal Vohra told ET he and Sharma have been friends for 25 years. Congress heavyweight Salman Khurshid says his and Sharma’s “contrasting political ideology” never got in the way of their friendship.

Does Sharma’s friendship extend to AAP, which has just routed BJP in Delhi polls. AAP leaders privately complain about India TV’s “bias”. Some AAP supporters tweeted photos of what they claimed to be India TV vehicles campaigning for BJP. Sharma refutes suggestions of an anti-AAP bias. “I have relationships with individuals and not with parties. Like other political parties, I have friends in AAP also,” he says. Arvind Kejriwal in Aap Ki Adalat?

AAP के  आने से भारतीय राजनीति में क्या बदला ?

आम आदमी पार्टी के दिल्ली की सत्ता में वापस लौटने और अरविंद केजरीवाल के फिर से मुख्यमंत्री बनने के बाद ये सवाल फिर उठ रहा है कि क्या भारतीय राजनीति बदलेगी ? क्या भारतीय राजनीति से वंशवाद खत्म होगा ? क्या भारतीय राजनीति में हमारे और आपके जैसे आम मतदाता शामिल हो पाएगा ?

 
सवाल बहुत से हैं और जवाब भविष्य के गर्भ में छिपा हुआ है. लेकिन एक सवाल का जवाब है. आम आदमी पार्टी ने अब तक भारतीय राजनीति में क्या बदला ?

आपको पता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव जीतने से पहले यूपी की जनता से क्या वादे किए थे ? समाजवादी पार्टी के घोषणापत्र में क्या था ? और अब तक उन वादों में से कितने पूरे हुए हैं ? अच्छा अगर आप यूपी से नहीं बिहार से हैं तो क्या आपको पता है कि बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने बिहार की जनता से चुनाव के पहले क्या वादे किए थे ? और उनमें से अब तक कितने पूरे हुए हैं. हो सकता है ये पुरानी बातें हो. क्योंकि इन दोनों राज्यों में चुनाव हुए काफी समय बीत चुका है. लेकिन हाल ही में झारखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा में चुनाव हुए हैं. तीनों ही राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है. क्या आपको याद है कि रघुवर दास, देवेंद्र फडणवीस और मनोहर लाल खट्टर ने चुनाव से पहले अपने राज्य की जनता से क्या वादे किए थे ? और अब तक उनमें से कितने पूरे हुए हैं ?

मुझे नहीं लगता कि आपको याद भी होगा. लेकिन दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने क्या वादे किए हैं. ये आपको जरूर याद होगा. भले ही 70 वादे ना याद हो. लेकिन मुफ्त वाई फाई, मुफ्त पानी और बिजली के दाम करने जैसे वादे जरूर याद होंगे. और सिर्फ दिल्ली ही नहीं पूरा देश ये जानना चाहता है कि आम आदमी पार्टी अपने वादे कब तक और कैसे पूरा करेगी ?

अब आपको समझ में आया आम आदमी पार्टी ने देश की राजनीति में क्या बदला है ? आम आदमी पार्टी ने हमें और आपको अपनी सरकारों से सवाल पूछना सिखाया है. आज तक हुए सभी चुनावों में राजनीतिक पार्टियां घोषणाएं तो कर देती हैं लेकिन सरकार बनने के बाद उन्हें भूला दिया जाता है. आम आदमी पार्टी अपने वादे पूरे कर पाएगी या नहीं ये अलग विषय है लेकिन आज सभी उन वादों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं. मैं भारतीय राजनीति में आम आदमी पार्टी की ये बड़ी देन मानता हूं कि हम और आप अब अपनी सरकारों से सवाल पूछ रहे हैं. उनके किए वादों के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं.

 
अगर आप किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं हैं तो जहां तक मैं सही हूं आपने किसी राजनीतिक दल का प्रचार नहीं किया होगा. वो भी खास तौर पर तब जब आप नौकरी करते हों. शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान खुद को समय नहीं दे पाता है. फिर किसी राजनीतिक पार्टी का प्रचार करना तो बहुत दूर की बात है.

आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी का प्रचार करने के लिए पूरे देश से हजारों युवा आए. ये वो युवा हैं जो देश की बड़ी – बड़ी कंपनियों में नौकरी करते हैं. जिनका एक-एक मिनट बहुत कीमती होता है. इन लोगों ने आम आदमी पार्टी के लिए जमकर प्रचार किया. क्योंकि इन्हें अरविंद केजरीवाल पर भरोसा था कि वो भारतीय राजनीति की दिशा बदलेंगे.

मैं जिनकी बात कर रहा हूं ये वो लोग नहीं है जिन्हें राजनीति में बहुत रुचि है. या फिर उनका किसी राजनीतिक पार्टी की तरफ झुकाव है. ये वो लोग हैं जिन्होंने बस इस उम्मीद से आम आदमी पार्टी का साथ दिया कि भारतीय राजनीति में कुछ बदलेगा. कुछ अच्छा होगा. आम आदमी पार्टी ने भले ही देश के सभी युवाओं की सोच ना बदली हो. लेकिन युवाओं को राजनीति की तरफ लाना जरूर शुरू कर दिया है. जिसे मैं एक बड़ी उपलब्धि मानता हूं.

 
चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियां जमकर पैसे खर्च करती हैं. चुनाव आयोग के दिशा निर्देशों को ताक पर रखकर राजनीतिक पार्टियां करोड़ों रुपये चुनाव में खर्च करती हैं. और जाहिर सी बात है इसके लिए वो देश के बड़े – बड़े उद्योगपतियों से पैसा लेती हैं. जिन्हें चुनाव के बाद अनैतिक रूप से फायदा भी पहुंचाती हैं. लेकिन आम आदमी पार्टी ने चुनाव लड़ने के लिए आम जनता से पैसा लेना शुरू किया. आम आदमी पार्टी ने जनता को ये अहसास दिलाया कि हम नहीं आप चुनाव लड़ रहे हैं. हो सकता है आम आदमी पार्टी ने देश के उद्योगपतियों से भी पैसा लिया हो. लेकिन आम आदमी पार्टी ने इसमें जनता को भी शामिल किया. हालांकि आम आदमी पार्टी पर गलत तरीके से चंदे लेने के भी आरोप भी लगे. हो सकता हैं ये सही भी हो. लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी वेबसाइट पर चंदे की पूरी डिटेल देकर उसमें पार्दर्शिता लाने की कोशिश की.

बीजेपी, कांग्रेस, एसपी, जेडीयू, बीएसपी को किसने और कितना चंदा दिया ये आप कभी नहीं जान पाएंगे. लेकिन आम आदमी पार्टी को किसने और कितना पैसा दिया आप उनकी वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं. मुझे लगता है कि ये भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव है. एक राजनीतिक पार्टी ने ये सिद्ध कर दिया जनता के पैसे से भी चुनाव लड़ा जा सकता है और जीता भी जा सकता है.

लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को करीब 31 फीसदी वोट मिले थे. मेरी उम्र ज्यादा नहीं है इसलिए शायद मेरे ख्याल में कोई ऐसी पार्टी नहीं है जिसे विधानसभा या लोकसभा चुनाव में हाल फिलहाल कुल पड़े वोटों का 50 प्रतिशत से भी ज्यादा मिला हो. लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 54.3 प्रतिशत वोट मिले. जबकि बीजेपी को 32.2 फीसदी, कांग्रेस को 9.7 फीसदी और बीएसपी को 1.3 फीसदी ही वोट मिले. यानी की दिल्ली के हर दूसरे वोटर ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया. यानी की समाज के हर वर्ग ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया. हिंदू, मुस्लिम और सिख ने आम आदमी पार्टी का साथ दिया.

 
सीएसडीएस के आंकड़े के अनुसार दिल्ली के 12 प्रतिशत मुस्लिमों में से करीब 77 फीसदी ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया. जबकि दिल्ली की 4 फीसदी वाली सिख आबादी में से करीब 57 फीसदी ने आम आदमी पार्टी का साथ दिया. आम आदमी पार्टी ने बीएसपी के वोटरों में भी सेंध मारी. पिछली बार बीएसपी को करीब 7 फीसदी के आसपास वोट मिला था जबकि इस बार सिर्फ 1 फीसदी ही रह गया है. यानी की मुस्लिम, दलित, सिख सबने आप का साथ दिया है.

यानी की धर्म और जाति के नाम पर भारत में वोटों का जो ध्रुवीकरण आज तक होता रहा है उस पर आम आदमी पार्टी ने करारा प्रहार किया है. आम आदमी पार्टी ने समाज के सभी वर्गों तक अपनी पहुंच बनाई और लोगों का विश्वास जीता. जिससे बीजेपी, कांग्रेस और एसपी जैसे राजनीतिक दल सीख सकते हैं. जिनकी राजनीति ही धर्म और जाति पर टिकी हुई है.

 
ऐसी बहुत सी छोटी-छोटी चीजें हैं जो आम आदमी पार्टी ने बदली हैं. लेकिन अपनी कोशिशों में आम आदमी पार्टी कितना कामयाब हो पाएगी या फिर देश की बाकी पार्टियों जैसी ही हो जाएगी, ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा. लेकिन इतना है कि आम आदमी पार्टी ने देश की राजनीति को एक नई दिशा दी है. और अन्य राजनीतिक दलों को इससे सिखना चाहिए.

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