Mechanical Engineer, Columnist, fan of AK, KV

18 Feb, 2015, 2006 hrs IST, PTI

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Parekh has said that impatience has begun creeping in among businessmen as nothing has changed on ground in first nine months of the Modi govt.
MUMBAI: Pitching for relaxing “administrative controls” to improve ease of doing business, top industry leader Deepak Parekh feels that impatience has begun creeping in among businessmen as nothing has changed on ground in first nine months of the Narendra Modi government.

He said the industry is still optimistic about the changes it expects from the Modi government, but optimism is not translating into revenues and there has been little improvement on ‘ease of doing business’ front so far.

Parekh, who is known as a guiding voice of the Indian industry and has been on a number of key government panels on various policy and reform matters, further said that ‘Make in India’ can’t succeed unless it is made easier for people to do business here and the decisions are fast-tracked.

“I think there is still a lot of optimism among the people of the country and among the industrialists and entrepreneurs that the Modi government will be good for business, for progress, for reducing corruption. They think this government means business on all these fronts.

“However, after nine months, there is a little bit of impatience creeping in as to why no changes are happening and why this is taking so long having effect on the ground.

“The optimism is there but it is not translating into revenues. Any industry you see, when there is a lot of optimism, the growth should be faster,” Parekh said.

Parekh, an eminent banker and Chairman of financial services giant HDFC, has always been very vocal with his views on reform and policy measures taken by the various governments over the past three decades.

He was among the first industry leaders to openly criticise the previous UPA Government for “policy paralysis” after a spate of scams led to decisions getting delayed within the government and business began getting hurt.

“The thing is that our Prime Minister had a lucky period in these nine months. The world commodity prices are at all-time low which help India the most,” Parekh said.

Stating that India is again at a position when everyone is looking at it with high hopes, he said, “I don’t see ease of doing business changing so far.”

Parekh cited the example of delay faced by his own group’s HDFC Bank, the country’s top private sector lender, with regard to approvals required for raising of funds, including from overseas.

हिन्दी ट्रांसट्रांसलेशन

मुंबई : देश के बैंकिंग क्षेत्र की प्रमुख हस्ती और एचडीएफसी के प्रमुख दीपक पारेख ने देश में कारोबार की सुगमता के लिए ‘प्रशासनिक बंदिशों’ में ढील देने की वकालत करते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार के पहले नौ माह के कार्यकाल में जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिखने से उद्यमियों में अधीरता पैदा होने लगी है। उन्होंने कहा कि इन नौ महीनों में प्रधानमंत्री के लिए समय बहुत भाग्यशाली रहा है, क्योंकि वैश्विक जिन्स कीमतें अपने निम्नतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिसका भारत को सबसे अधिक फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि भले ही उद्योग जगत मोदी सरकार से अपेक्षित बदलावों को लेकर अब भी आशावान है, लेकिन यह आशावादिता कारोबारियों के लिए राजस्व में नहीं बदल रही है और ‘कारोबार को सुगम बनाने’ के मोचे पर अभी बहुत कम सुधार देखने को मिला है।

पारेख को भारतीय उद्योग जगत के पथ-प्रदर्शकों के रूप में देखा जाता है। वह नीति व सुधारात्मक मुद्दों पर गठित अनेक प्रमुख सरकारी समितियों के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान भी तब तक सफल नहीं हो सकता, जब तक लोगों के लिए कारोबार करना सुगम नहीं किया जाता और त्वरित फैसले नहीं किए जाते।

उन्होंने कहा, ‘मेरी राय में देश के लोगों, उद्योगतिपयों व उद्यमियों को अब भी बहुत उम्मीद है कि मोदी सरकार कारोबार के लिए, उन्नति के लिए व भ्रष्टाचार कम करने के लिए अच्छी होगी, और उन्हें लगता है कि यह सरकार इन सभी मोर्चों पर काम करेगी…’

पारेख ने कहा, ‘नौ महीने के बाद थोड़ी-बहुत अधीरता सामने आने लगी है कि कोई बदलाव क्यों नहीं हो रहा और जमीनी स्तर पर असर दिखने में इतना समय क्यों लग रहा है… हालांकि उम्मीद तो बरकरार है, लेकिन इसकी झलक कमाई में नहीं दिख रही… आप किसी भी उद्योग को लें, जब वहां बहुत आशावाद होता है, तो वृद्धि भी तेज होनी चाहिए…’ उल्लेखनीय है कि पारेख बीते तीन दशकों में विभिन्न सरकारों के सुधारात्मक व नीतिगत कदमों को लेकर बहुत मुखर रहे हैं। वह ‘नीतिगत मोर्चे पर ढिलाई’ को लेकर पिछली यूपीए सरकार की आलोचना करने वाले पहले उद्योगपतियों में से थे।

पारेख ने कहा, ‘बात यह है कि इन नौ महीनों में प्रधानमंत्री के लिए समय बहुत भाग्यशाली रहा है। वैश्विक जिन्स कीमतें अपने निम्नतम स्तर पर हैं, जिसका भारत को सबसे अधिक फायदा हुआ है…’ उन्होंने कहा कि भारत एक बार फिर ऐसी स्थिति में है, जहां हर कोई उसे बड़ी उम्मीद से देख रहा है। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि कारोबार करने में सुगमता के लिहाज से अभी कुछ बदला है…’ पारेख ने इस संबंध में एचडीएफसी बैंक को धन जुटाने के लिए मंजूरियों में देरी का उदाहरण भी दिया।

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