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बिहार : इस चाणक्य से तो चंद्रगुप्त भी डर गए होंगे...

शायद नाम चाणक्य का है, इसलिए भी दहशत होती होगी। चाणक्य ने कहा है तो सही हो सकता है। एग्जिट पोल की दुनिया में चाणक्य ने ऐसा नंबर दिया है कि भाजपा के भीतर हर दूसरे दावेदार के मन में चंद्रगुप्त के ख़्वाब आ रहे होंगे। ऐसा नहीं है कि भाजपा में जीत के दावेदार नहीं थे। उनके नेता दो तिहाई बहुमत का दावा तो कर ही रहे थे, लेकिन वही इस सच्चाई को बता सकते हैं कि क्या वाक़ई उन्हें कभी लगा था कि चाणक्य के एग्जिट पोल के अनुसार 155 सीटें आएंगी। चाणक्य के इस नंबर ने पटना से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मचा दिया है।

बल्कि अभी तक जो चुनाव एनडीए बनाम महागठबंधन की शक्ल में हो रहा था अब चाणक्य बनाम बाकी तमाम एग्जिट पोल हो गया है। आठ तारीख को दुनिया अब यह देखेगी कि चाणक्य ने जो कहा है वो सही होता है या नहीं। चाणक्य ने इतना बड़ा जोखिम लिया है तो वह इसका हक़दार तो है ही। नतीजे आने तक सब हर नंबर को चाणक्य की नज़र से देखेंगे। इसलिए इन तीन दिनों के नायक न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं न मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

बिहार के चुनाव ने इस बार सबको फ़ेल कर दिया है। नेता से लेकर पत्रकार… नतीजे को लेकर निष्कर्ष पर जब नहीं पहुंचे तो सब कांटे की टक्कर लिखने लगे। किसी ने यह नहीं लिखा कि हंग असेंबली होगी, लेकिन कांटे की टक्कर सबने लिखा। दूसरे चरण के बाद कई लोग कहने लगे कि महागठबंधन है। फिर तीसरे चरण से पहले कई लोगों की नई जमात आई जो कहने लगी कि बीजेपी जीत रही है। इसके लिए बिहार के मतदाता की तारीफ करनी चाहिए कि उसने अच्छे-अच्छों के पसीने छुड़ा दिए। कांटे की टक्कर दो पक्षों में जितनी नहीं थी उससे ज्यादा पत्रकार, राजनीतिक पंडितों बनाम मतदाता में थी। इतना ज़िद्दी वोटर तो मैंने भी नहीं देखा। अपने दोस्त रिश्तेदार भी नहीं बताते थे कि किसे वोट कर रहे हैं!

चाणक्य ने कांटे की टक्कर से भी ज़्यादा ख़्याति प्राप्त कर ली है। अगर बीजेपी की सरकार नहीं बनी तो सारे कांटे चाणक्य को ही चुभेंगे और बन गई तो वही कांटे फूल बन जाएंगे। भारत में ऐसा कोई सर्वे वाला सर्वेसर्वा नहीं है, जिसने दस भविष्यवाणी सही न की हो और पचीस भविष्यवाणी ग़लत न की हो। जिसकी गलती होती हो उसे हम गरियाते ज़रूर हैं मगर भूल भी जाते हैं। अगले चुनाव में फिर एग्जिट पोल-एग्जिट पोल करने लगते हैं। ग़लत होने के डर से किसी ने एग्जिट पोल बंद नहीं किया तो चाणक्य क्यों डर जाए। क्या आप या हम अपने अपने नंबरों पर दांव लगाने से बाज़ आते हैं? मुझे तो दिन भर में सौ फोन आते हैं कि कौन जीतेगा। चाणक्य के बाद से तीन सौ फोन आने लगे हैं कि तुमने देखा चाणक्य क्या कह रहा है?

तो एग्जिट पोल के तनाव से गुज़रना पड़ता है तो गुज़रिये। भारत में चुनाव ही अब दो बात पर होता है कि नेता कौन होगा और सरकार किसकी बनेगी। इसके अलावा बाकी स्वास्थ्य से लेकर स्कूल में टीचर नहीं हैं, के सवाल पन्ने भरने के लिए होते हैं। सबको नंबर चाहिए। एग्जिट पोल ने वही किया है। अब कमज़ोर दिल वालों का कुछ नहीं किया जा सकता। ऐसे लोग दोनों तरफ होते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि कई लोग चाहते हैं कि बीजेपी बुरी तरह हारे और कई लोग चाहते हैं कि जीते। दोनों ही प्रकार की चाहत में बीजेपी ही है! ऐसे कमज़ोर लोगों में दहशत हो गई है। बीजेपी की जीत चाहने वाले भी डर गए हैं कि ‘हे भगवान चाणक्य का ग़लत हो गया तो।’ बीजेपी को हराने वाले भी डर गए हैं कि ‘हे भगवान चाणक्य का सही हो गया तो।’

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