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Archive for the ‘Uncategorized’ Category

#प्रेसकॉन्फ्रेंस: पढ़ें केजरीवाल के इंटरव्यू का शब्द-ब-शब्द ट्रांस्क्रिप्ट

Saturday, 25 July 2015

नई दिल्ली: एबीपी न्यूज के खास कार्यक्रम ‘प्रेस कांफ्रेंस’ में अरविंद केजरीवाल से पूछे गए तीखे सवाल और उन्होंने भी तीखे सवालों का बड़ी बेबाकी से जवाब दिए.

यहां पढ़ें अरविंद केजरीवाल के इंटरव्यू की पूरी ट्रांस्क्रिप्ट:-

सवाल दिबांग: फरवरी में चुनाव खत्म हो गए 2014 में पर ऐसा लग रहा है कि अरविंद केजरीवाल अभी भी कैंपेन मोड में हैं आप उससे बाहर ही नहीं निकल पा रहे हैं, लग रहा है कि कल ही चुनाव होने वाले हैं.

जवाब केजरीवाल- ऐसा क्या कर रहे हैं हम लोग?

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दिबांग- आप लगातार लड़ते-भिड़ते, बैठ कर संयम से कहीं काम करते नहीं दिखायी दे रहे हैं, लग रहा है बहुत जल्दी में हैं हड़बड़ी में हैं?

केजरीवाल- नहीं जल्दी में हैं तो अच्छा है, ज्यादा काम करेंगे. जनता ने इसीलिए वोट दिया है कि ज्यादा काम करें. जनता इस बात से खुश भी बहुत है कि हम लोग ज़्यादा काम कर रहे हैं लेकिन जो कहा जा रहा है कि हम लड़ाई कर रहे हैं तो वो तो हम कुछ भी नहीं कर रहे हैं, हमारे काम में बाधांए पहुचाई जा रही है, तरह-तरह की अड़चनें पहुंचाई जा रही है. तरह-तरह से परेशानियां क्रिएट की जा रही हैं, हम तो कोशिश कर रहे हैं कि उन परेशानियों को लांघ के जनता के लिए काम करते रहें और जितना काम हमने पिछले चार महीने में किया है ये तो जनता मान रही है कि किसी ने इतना काम नहीं किया है. जितने लोग मिलते हैं.

जैसे आप ने कहा हम कैंपेन मोड में हैं तो मैं जनता के बीच बहुत घूमता हूं, अभी भी घूमता हूं, हालांकि चुनाव के बाद कोई नेता दिखाई नहीं देता जनता के बीच में लेकिन अभी भी मैं लगभग हर शाम किसी ना किसी इलाके में रहता हूं. जनता बहुत खुश है, एक सेंस जो आता है. और ये किसी भी पॉलिटिकल पार्टी के लिए बहुत बड़ी बात है. इतने भारी बहुमत से जीतने के बाद एक्सपेक्टेशन बहुत ज्यादा हो जाती हैं. तो पहले कुछ महीने किसी भी पार्टी के लिए बड़े मुश्किल होते हैं बीकॉज फिर डिलीवरी उतनी नहीं हो पाती. आज चार-पांच महीने के बाद भी अगर जनता इतनी खुश है तो ये मुझे लगता है कि हमारी पार्टी, हमारी सरकार के लिए अच्छा संदेश है.

सवाल सबा नकवी- दिल्ली पुलिस को लेकर मैं सवाल करती हूं. मान लीजिए कि दिल्ली पुलिस किसी तरह आम आदमी पार्टी की सरकार के अंदर आ भी जाए तो वही फोर्स आप को मिलेगी, आप क्या चमत्कार कर सकते हैं और दूसरी बात क्या आप मानते हैं कि पुलिस सरकार के अधीन होनी चाहिए या पुलिस को इंडिपेडेंट भी होना चाहिए क्योंकि आज-कल रोज दिल्ली पुलिस को लेकर विवाद चल रहा है?

जवाब केजरीवाल- इसमें दो-तीन पहलू हैं, मैं इसमें थोड़ा सा क्लीयर करना चाहता हूं एक तो एक इंटरव्यू में मैंने ठुल्ला शब्द इस्तेमाल किया गया जिस पर बड़ी कॉन्ट्रोवर्सी हुई. दिल्ली पुलिस के अंदर ढेर सारे अच्छे लोग काम करते हैं मैं ये क्लीयर कर देना चाहता हूं और दिल्ली पुलिस बहुत सारे लोगों ने हमें सपोर्ट किया, हमें वोट दिया और हम भी जीतने के बाद उनके लिए खूब काम कर रहे हैं. हमारी पहली सरकार है जिसने ये ऐलान किया कि अगर दिल्ली पुलिस का कोई भी कर्मचारी अगर काम करते हुए शहीद हो गया तो उसको 1 करोड़ रुपए का मुआवजा देंगे. जैसे ही मैं मुख्यमंत्री बना 10 अप्रैल के आस-पास मैंने चिठ्ठी लिखी पुलिस कमिश्नर साहब को कि दिल्ली पुलिस के क्वाटर्स में कई कॉलोनी में गया था मैं चुनाव प्रचार के दौरान और मैंने देखा कि बहुत बुरे हाल में रह रहे हैं दिल्ली पुलिस के कर्मचारी. मैंने उनको कहा कि आपको ये सब करने के लिए इनके वेलफेयर के लिए क्या-क्या कमियां आ रही हैं मुझे बताइए मैं सेंटर के साथ बात करुंगा.

वजीरपुर के अंदर इनकी एक पुलिस कॉलोनी है, किंग्सवे कैंप में एक पुलिस कॉलोनी है, जिसमें हमने एमएलए फंड से काम करवाया है. जबकि दिल्ली सरकार की ये जिम्मेदारी नहीं है. हम काफी काम कर रहे हैं. उनका वेलफेयर हमारे लिए इंपार्टेंट है, ठुल्ला शब्द का मैंने सिर्फ उन चंद पुलिसवालों के लिए इस्तेमाल किया था जो भ्रष्टाचार करते हैं, रेड़ी-पटरी वालों को तंग करते हैं. ये मैं क्लीयर करना चाहता हूं. पुलिस वालों के लिए मेरे मन में, अब मैं आपके सवाल पर आता हूं सॉरी थोड़ा लंबा हो गया. पुलिस के ऊपर डेमोक्रेटिक कन्ट्रोल होना बहुत जरुरी है, पॉलिटिकल कन्ट्रोल होना बहुत जरुरी है. पॉलिटिक्स अच्छी हो अगर पॉलिटिक्स ही खराब हो तो वो दिल्ली पुलिस का बहुत दुरुपयोग करते हैं. दूसरी चीज हमारे पुलिस कमिश्नर साहब के साथ कोई मतभेद नहीं है अभी कमिश्नर साहब मुझसे मिलने आए थे. मैंने अंदर कमरे पुलिस कमिश्नर बस्सी साहब सारी दिल्ली मानती है कि आप ईमानदार आदमी हो, सारी दिल्ली मानती है आप अच्छे आदमी हो लेकिन आज पुलिस को गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. बस्सी साहब नहीं कर रहे जो कुछ हो रहा है, सब कुछ ऊपर से आ रहा है, पीएमओ से आ रहा है.

मैं आपको दिखाता हूं ये एक एफआईआर है मेरे खिलाफ. सिटिंग चीफ मिनिस्टर के खिलाफ, किस लिए? ठुल्ला शब्द का इस्तेमाल करने के लिए. आज तक भारत के इतिहास में कभी ऐसा हुआ है किसी सीटिंग चीफ मीनिस्टर के खिलाफ इतनी फ्रीवलेस एफआईआर किसी ने लिखी हो. ये बस्सी साहब ने नहीं लिखवाई, ये नीचे पुलिस वाले ने नहीं लिखवाई. किसी ना किसी ने ऊपर से मतलब कोई बहुत जबरदस्त प्रेशर रहा होगा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर लिखवाई.

हमारे एक कार्यकर्ता को पुलिस वैन ने कुचलने की कोशिश की उसपर एफआईआर नहीं हुई, व्यापम का इतना बड़ा घोटाला हो गया शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ एफआईआर नहीं हुई, ललित गेट का इतना बड़ा घोटाला हो गया, वसुंधरा राजे के खिलाफ एफआईआर नहीं सुषमा स्वराज जी के खिलाफ एफआईआर नहीं हुई, केजरीवाल ने ठुल्ला कह दिया इसलिए, इसके पीछे की पॉलिटिक्स को समझने की कोशिश कीजिए कि ये जो 67 सीट जो आई है उसने बहुत सारे लोगों की नींव हिला दी है, नींद हराम कर दी है. वो बदला ले रहे हैं दिल्ली की जनता से लेकिन जब आप सच्चाई पर चलते हैं ना तब चिंता करने की जरुरत नहीं है.
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Google lists Modi among ‘world’s most stupid prime ministers’

Google lists Modi among ‘world’s most stupid prime ministers’

Published: July 25, 2015

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Google took a hit at Indian Prime Minister Narendra Modi once again as the tech giant listed him among the ‘world’s most stupid prime ministers.’

On searching for ‘world’s most stupid prime ministers’, Modi’s images appear multiple times and more times than any other premier’s.

Modi is joined by British Prime Minister David Cameron, Australian Prime Minister Tony Abbott and even former leaders such as the first prime minister of Singapore, Lee Kuan Yew.

Aam Aadmi Party Government’s Delhi WiFi Project: Stakeholders Consultation from 24-26th March 2015

Government of National Capital Territory of Delhi intends to provide Delhi wide Wi-Fi for providing internet services. This facility will open up many other economic avenues.

In this regard, it is proposed to obtain feedback from one and all. Interested persons, organizations, stakeholders are requested to send their suggestions on business models, technologies, implementation strategies etc. on email: delhiwidewifi@gmail.com on or before 23-03-2015, 5:00 PM IST.

A structured stakeholder meeting is also being organized by the Department of Information Technology, GNCTD on 24th, 25th and 26th March 2015. Detailed document regarding this meeting is available on website http://delhi.gov.in/DoIT/DoIT_IT/PDF/StakeholdersConsultation.pdf

Interested stakeholders who intend to participate in the said meeting are requested to confirm their participation at delhiwidewifi@gmail.com on or before 20-03-2015, 5:00 PM IST.

Wi-Fi in Delhi Stakeholder Consultation Meet
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Admiral Ramdas writes to AAP leaders urging them to be ‘together and united’, “One Man One Post”

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Full Text:
Political parties in India take years to gain traction and win elections, unless they are headed by film stars. There isn’t a matinee idol at the helm of the Aam Aadmi Party, and yet just in a little over two years of its formation, it has wrested an astounding, nearly unprecedented victory in all-time Indian electoral history by winning 67 out of 70 seats in the 2015 Delhi assembly polls.
Much of the credit goes to the party’s extraordinary ability to galvanise volunteers at the grassroots through its promise of cleansing Indian politics. As a party that grew out of the anti-corruption movement, it has been driven by the idealism of its faceless supporters. But sentiment alone couldn’t have been shaped into electoral success in the absence of a powerful leader, who in the case of AAP, is undoubtedly the charismatic crusader and founder of the party, Arvind Kejriwal, now the chief minister of Delhi. The party swept Delhi on the back of the slogan “Paanch Saal Kejriwal” (Five years for Kejriwal). 

Kejriwal is now no less of a crowd puller than a film star. The day he took oath as chief minister, Ramlila Maidan, three times as large as a football field, was packed with tens of thousands of supporters, wearing caps and mufflers imprinted with his image.

The near identification of AAP with Kejriwal has been disquieting for other leaders in the party. Senior lawyer Prashant Bhushan and academic Yogendra Yadav, in particular, are believed to view critically the personality cult forming around Kejriwal, as well as the concentration of power. In January, both voiced their disagreements with the party’s selection of some candidates in the Delhi polls, prompting Admiral (retired) Laxminarayan Ramdas, the party’s Ombudsman or Lokpal, to hold an enquiry. 

On Thursday, the party’s national executive committee met amidst rumours of deepening strife within the party. Ramdas, who could not attend the meeting, sent a strongly worded letter to the members of the NEC and the political advisory committee. In the letter, which Scroll reproduces in full length below, he said, “During the past six to eight months there has been an abject breakdown in communications and mutual trust amongst the topmost leadership of the party. This has in my view led to the growth of two camps within the party and loose talk about conspiracies. This is unacceptable and shows that we are no different from any of the parties whom we criticise so vocally.” Ramdas urged the leaders “to anticipate, head off, and resolve, debilitating disagreements and conflicts”.

But the attempt to resolve the disagreements appears to have only fuelled more conflict. In the meeting, taking off from Ramdas’ letter, Bhushan circulated an individual note, as well as a jointly authored note with Yogendra Yadav, outlining an action plan. According to some media reports, he also proposed that Yadav be made the convenor of AAP, a position currently held by Kejriwal. This appears to have not gone down well with others in the party, and there are rumours that the PAC itself might be reconstituted and Yadav and Bhushan might be edged out.

On Saturday, Yadav made light of the rumours in an interview with ANI. He said he saw AAP as a long-term player, and he was willing to take on any responsibility the party entrusted him with.

Speaking with Scroll on Sunday, Bhushan denied that he had proposed Yadav’s name for the convenor’s post. But he confirmed that he had circulated a note jointly authored with Yadav on the institutional reforms needed in the party. He also circulated a separate note individually which explained why the reforms were needed. “The reforms are needed to make the party more transparent and its functioning more credible,” he said. He refused to divulge the details of the recommendations he made. When asked if his future involvement in the party was predicated in the response that his proposal gets, he said, “We’ll see what will happen.” 

“I am in the party because of the ideals and principles on which it was founded,” he said. “I will try to ensure that it remains true to those ideals.”

Here is the full text of the letter written by Ramdas.
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मोदी के ताने का AAP सरकार ने ऐसे दिया जवाब

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जो बिजली बना नहीं सकते, वे मुफ्त बिजली के वादे कर रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को यह बात कही थी। कई लोगों का मानना था कि उन्होंने यह तंज अरविंद केजरीवाल सरकार पर किया था। अब केजरीवाल सरकार ने केंद्र से कहा है कि वह उसे एक कोल ब्लॉक दे, जिसकी मदद से कोई प्राइवेट फर्म दिल्ली में पर्याप्त मात्रा में किफायती बिजली मुहैया कराने के लिए एक बड़ा पावर प्लांट लगा सके। दिल्ली के पावर मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ने ईटी को यह जानकारी दी है।

जैन ने बताया कि राज्य सरकार के पास पावर सेक्टर में रिफॉर्म की बड़ी योजना है। इसके तहत रिन्यूअबल और परंपरागत, दोनों स्रोतों से बिजली उत्पादन को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘हमने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि जहां भी संभव हो, हमें एक कोल ब्लॉक दिया जाए। हम इस बारे में जल्द औपचारिक अनुरोध करेंगे। हमारी योजना अगले 4-5 वर्षों में अपने दम पर 4,000 मेगावॉट बिजली बनाने की है।

जैन ने कहा कि नई सरकार जिस बड़े आइडिया पर काम कर रही है, उसके मुताबिक इसके अपने कोल ब्लॉक से किसी प्राइवेट फर्म को ‘अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट’ चलाने के लिए ईंधन दिया जाएगा। वहां पैदा हुई बिजली दिल्ली को मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘हम इसके लिए कॉम्पिटिटिव बिडिंग कराएंगे और प्राइवेट प्रॉड्यूसर को ब्लॉक के पास ही कोयले से बिजली बनाने का मौका देंगे। इस तरह उसे कोयला दिल्ली लाने और यहां बिजली बनाने की जरूरत नहीं होगी। इससे लागत बचेगी। बनाई गई बिजली ग्रिड्स के जरिये दिल्ली लाई जा सकती है। हम प्रॉड्यूसर से पावर परचेज अग्रीमेंट करेंगे और जितनी बिजली की खपत हम करेंगे, उसका उसे भुगतान किया जाएगा।’
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PM Modi has had a lucky tenure till now; doing biz remains tedious: Deepak Parekh

18 Feb, 2015, 2006 hrs IST, PTI

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Parekh has said that impatience has begun creeping in among businessmen as nothing has changed on ground in first nine months of the Modi govt.
MUMBAI: Pitching for relaxing “administrative controls” to improve ease of doing business, top industry leader Deepak Parekh feels that impatience has begun creeping in among businessmen as nothing has changed on ground in first nine months of the Narendra Modi government.

He said the industry is still optimistic about the changes it expects from the Modi government, but optimism is not translating into revenues and there has been little improvement on ‘ease of doing business’ front so far.

Parekh, who is known as a guiding voice of the Indian industry and has been on a number of key government panels on various policy and reform matters, further said that ‘Make in India’ can’t succeed unless it is made easier for people to do business here and the decisions are fast-tracked.

“I think there is still a lot of optimism among the people of the country and among the industrialists and entrepreneurs that the Modi government will be good for business, for progress, for reducing corruption. They think this government means business on all these fronts.

“However, after nine months, there is a little bit of impatience creeping in as to why no changes are happening and why this is taking so long having effect on the ground.

“The optimism is there but it is not translating into revenues. Any industry you see, when there is a lot of optimism, the growth should be faster,” Parekh said.

Parekh, an eminent banker and Chairman of financial services giant HDFC, has always been very vocal with his views on reform and policy measures taken by the various governments over the past three decades.

He was among the first industry leaders to openly criticise the previous UPA Government for “policy paralysis” after a spate of scams led to decisions getting delayed within the government and business began getting hurt.

“The thing is that our Prime Minister had a lucky period in these nine months. The world commodity prices are at all-time low which help India the most,” Parekh said.

Stating that India is again at a position when everyone is looking at it with high hopes, he said, “I don’t see ease of doing business changing so far.”

Parekh cited the example of delay faced by his own group’s HDFC Bank, the country’s top private sector lender, with regard to approvals required for raising of funds, including from overseas.

हिन्दी ट्रांसट्रांसलेशन
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किरण बेदी को सीएम उम्मीदवार बनाया जाना बीजेपी की बड़ी भूल : आरएसएस

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आरएसएस ने किरण बेदी को दिल्ली चुनाव में बीजेपी की हार का जिम्मेदार बताया है। यही नहीं संघ ने किरण बेदी को सीएम कैंडिडेट बनाए जाने को बीजेपी की बड़ी भूल माना है। संघ ने अपने मुखपत्र में लिखे एक लेख में कई सवाल भी उठाए हैं।
अपने मुखपत्र पांचजन्य के ताजा अंक में बीजेपी की हार के कारणों का विश्लेषण किया है। संघ ने किरण बेदी के सीएम कैंडिडेट बनाए जाने को बीजेपी की बड़ी भूल माना है। इसके साथ ही संघ ने पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी को पार्टी की हार की एक बड़ी वजह माना है।

अपने मुखपत्र में ‘आकांक्षाओं की उड़ान’ शीर्षक से कवर स्टोरी प्रकाशित कर संघ ने सवाल किया है, ‘बीजेपी क्यों हारी? क्या बेदी को सीएम कैंडिडेट बनाना सही था? अगर हर्षवर्द्धन या दिल्ली बीजेपी के दूसरे नेताओं के नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया होता तो परिणाम दूसरे होते?’

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